Source: भास्कर न्यूज | Last Updated 09:10(07/06/10)
जयपुर. टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज में कपड़ों को रंगने की प्रक्रिया में लाखों लीटर पानी प्रयोग किया जाता है। इस पानी में कटौती तो नहीं की जा सकती, लेकिन इस कैमिकल युक्त रंगीन पानी का रिसाइकल कर दुबारा काम में लिया जा सकता है। जल जागरण अभियान के तहत सिटी रिपोर्टर ने शहर के स्टूडेंट्स और उनके फै कल्टीज से बात की जिन्होंने इस पर रिचर्स की है और जाना कि डाई वेस्ट पानी को कैसा प्योरीफाई किया जा सकता है।
सरकार डाई वेस्ट वॉटर पर करे विचार
सांगानेर स्थित रंगाई-छपाई की 1३५ यूनिटों से रोजाना लाखों लीटर डाई वेस्ट वॉटर निकलकर अमानीशाह नाले या सड़क किनारे फैल रहा है। सरकार को इस वॉटर क ो प्यूरिफाइ करके प्योर वॉटर बनाने पर विचार करना चाहिए। यह कहना है शांति एजुकेशन सोसायटी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट के कैमिस्ट्री डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ. गौतम सिंह का। उन्होंने बताया कि इस पानी में बीओडी, सीओडी, टीडीएस और टीएसएस जैसे हारिकारक कैमिकल और कई हैवी मैटल्स होते हैं। यह न सिर्फ पर्यावरण, कृषि और पशु-पक्षियों के लिए नुकसानदायक है, बल्कि आसपास के खेतों में होने वाली फसलों का सेवन करने वालों में इससे गम्भीर बीमारियां भी हो सकती हैं।
सॉ-डस्ट से शुद्धीकरण सम्भव
डाई इंडस्ट्री से निकलने वाले गंदे पानी को कम लागत में रिसाइकल कर फिर से काम में लिया जा सकता है। यह कहना है शांति एजुकेशन सोसायटी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के स्टूडेंट्स त्रिलोचन यादव, भाग्यश्री मेवाड़ा, समरिता गुप्ता और दीपक अतरे का। उन्होंने इसके लिए रिचर्स कर शुद्धीकरण का एक बेतहर तरीका खोजा। उन्होंने डाई वेस्ट वॉटर को रिसाइकल करने के लिए सॉ-डस्ट (लकड़ी का बुरादा) को एक जार में भरकर इसकी कुछ परतें बनाईं। फिर इसमें कैमिकल युक्त डार्क मेहरून डाई वेस्ट वॉटर डाला। थोड़ी देर में सॉ-डस्ट ने नेचुरल एडजॉर्डेंट की प्रक्रिया से कैमिकल्स को एब्जार्ब कर वॉटर को प्यूरिफाई कर दिया। इसका ओजोनीकरण करके या इसमें फिटकरी या क्लोरीन डालकर इसे बैक्टीरिया मुक्त कर साफ किया जा सकता है।
अमानीशाह नाले में अपनाएं यह प्रक्रिया
रिसर्च के गाइड डॉ. सारू गुप्ता और डॉ. गौतम ने बताया कि इस प्रक्रिया को अमानीशाह के नाले में अपनाकर रंगाई-छपाई की यूनिटों से निकलने वाले डाई वेस्ट वॉटर को शुद्ध और बैक्टीरिया मुक्त कर रिसाइकल किया जा सकता है। इसके लिए नाले में जहां यह डाई वेस्ट वॉटर आकर मिल रहा है, वहां सॉ-डस्ट के कॉलम (मोटी परतें) बनाए जाएं। इससे यह कॉलम नेचुरल एडर्सोडेंट प्रक्रिया से वॉटर में शामिल सभी कैमिकल्स और मैटल्स को एब्जार्ब कर वहीं रोक ले और पानी प्यूरिफाइड होकर आगे जाए। इस प्यूरिफाइड वॉटर को ओजोनीकरण विधि से बैक्टीरिया मुक्त करें।
फिर इसे रीयूज करने के लिए इसको आसपास के खेतों की ओर मोड़ा जा सकता है या किसी फैक्ट्री में इसका प्रयोग किया जा सकता है। इस प्रक्रिया से लाखों लीटर डाई वेस्ट वॉटर का सदुपयोग किया जा सकता है।
कहां करें इसका रीयूज
कृषि पैदावार के लिए इस पानी का प्रयोग कर सकते हैं। घर के लॉन में देने और गाड़ियों क ो धोने के लिए इसका प्रयोग कर सकते हैं। किसी भी इंडस्ट्री या सांगानेर की डाई इंडस्ट्री में भी फिर से प्रयोग कर सकते हैं।
शुद्धीकरण का फायदा
> नेचुरल रिसोर्सेज की बचत
> वॉटर ट्रीटमेंट के इलेक्ट्रो कैमिकल मैथड से सस्ता होता है।
> वुडन इंडस्ट्री के आसानी से और सस्ते में मिलने वाले वेस्ट सॉ-डस्ट का भी सही इस्तेमाल होता है।
> बड़ी इंडस्ट्रीज भी इस प्रक्रिया को अपनाएं तो बहुत अच्छा है।
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