Friday, August 27, 2010

Sanganneri print सांगानेरी प्रिंट उद्योग के सहारे जीवनयापन करने वाले करीब तीन लाख लोगों के रोजगार पर संकट खड़ा हो गया है।

जयपुर. जयपुर के विश्वप्रसिद्ध सांगानेरी screen प्रिंट उद्योग के सहारे जीवनयापन करने वाले करीब तीन लाख लोगों के रोजगार पर संकट खड़ा हो गया है।

पर्यावरण मापदंडों पर खरा नहीं उतरने के कारण प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने 750 रंगाई-छपाई फैक्ट्री मालिकों को फैक्ट्री बंद करने के नोटिस जारी करना शुरू कर दिया है। बिजली कंपनी एवं जलदाय विभाग को इन फैक्ट्रियों के बिजली—पानी के कनेक्शन काटने को कहा गया है। मंडल ने जिला कलेक्टर को फैक्ट्री बंद नहीं करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई को भी लिख दिया है। क्षेत्र में पर्यावरण को खतरा बढ़ता देखकर मंडल ने अपनी अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है।

मंडल का मानना है कि ट्रीटमेंट प्लांट नहीं होने से रंगाई-छपाई के बाद बहने वाला पानी पेड़-पौधों, जीव-जंतुओं के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। इससे भी बड़ा खतरा इस पानी के उपयोग से पैदा होने वाले फल-सब्जी तथा फसलों के उपयोग से होने वाले विभिन्न जानलेवा रोग हैं। मंडल के सदस्य सचिव डी.एन. पांडेय बताते हैं कि फैक्ट्री संचालकों की गंभीरता नहीं देखते हुए सरकार ने सख्त कदम उठाने का फैसला किया है।

सरकार उद्योगों को संरक्षण देना चाहती है, लेकिन पर्यावरण को बनाए रखना भी हर कीमत पर जरूरी है। इधर फैक्ट्रियां बंद करने के नोटिस मिलने के साथ ही फैक्ट्री संचालकों में हड़कंप मच गया है। करीब 50 साल पुराने इस रंगाई-छपाई उद्योग के कई संचालकों ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से इस मामले में हस्तक्षेप का अनुरोध किया है। संचालकों का कहना है कि पानी का प्रदूषण सांगानेर ही नहीं, कई इलाकों में है। ट्रीटमेंट प्लांट को भी जल्द ही लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

फैक्ट्रियों में ट्रीटमेंट प्लांट नहीं होने से रंगाई-छपाई के उपयोग में आना वाला पानी क्षेत्र में पर्यावरण को जबर्दस्त नुकसान पहुंचा रहा है। मंडल ने सख्त रवैया अपनाते हुए फैक्ट्री बंद करने के नोटिस जारी किए हैं। फिलहाल इसके लिए समय सीमा तय नहीं की गई है। - डी.एन. पांडेय, सदस्य सचिव, राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल

सरकार ने यदि संवेदनशीलता नहीं दिखाई तो लाखों लोग बेरोजगार हो जाएंगे। पर्यावरण के लिए क्षेत्रवासी भी चिंतित हैं और ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के प्रयास जारी हैं। सरकार को तुरंत प्रभाव से नोटिस वापस लेने चाहिए। - घनश्याम तिवाड़ी, पूर्व मंत्री एवं स्थानीय विधायक

सरकार ने सख्ती की तो आंदोलन करेंगे

फैक्ट्री बंद करने के नोटिस जारी होने से तीन लाख लोगों को रोजगार का खतरा पैदा हो गया है। यदि सख्ती की गई तो आंदोलन किया जाएगा। पानी के ट्रीटमेंट के लिए कॉमन एफिलेंट ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के प्रयास जारी हैं। मुख्यमंत्री को मामले के समाधान की गुजारिश की गई है। - राजेंद्र जीनगर, अध्यक्ष, सांगानेर रंगाई-छपाई एसोसिएशन

Dainik bhaskar front page date 28/08/10

.....................सांगानेर की प्रिंटिंग इकाइयों का मुश्किल दौर होगा खत्म..........................


प्रदूषित पानी के लिए ट्रीटमेंट प्लांट का रास्ता होने से सांगानेर की प्रिटिंग इकाइयों की मुश्किलों का दौर समाप्त होने के आसार हो गए हैं। ट्रीटमेंट प्लांट के लिए इस सप्ताह शुक्रवार तक डीपीआर मिलने की उम्मीद है। इसके बाद ट्रीटमेंट प्लांट का काम भी जल्दी शुरू हो जाएगा। उल्लेखनीय है कि ट्रीटमेंट प्लांट नहीं होने से सरकार ने इन इकाइयों को भू उपयोग बदलने की अनुमति नहीं दी थी। इसके चलते इन इकाइयों को बैंकों से ऋण भी नहीं मिल पा रहा था लेकिन अब ट्रीटमेंट प्लांट लगने के बाद समस्याएं समाप्त हो जाएगी।

सांगानेर कपड़ा रंगाई-छपाई एसोसिएशन के महासचिव राजेंद्र जीनगर ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला हक में आने के बावजूद काफी समय तक ट्रीटमेंट प्लांट की फाइल दो विभागों के बीच फुटबाल बनी रही थी। बिजनेस भास्कर ने भी इस समस्या को उठाया था। इसके चलते अब ट्रीटमेंट प्लांट की स्थपना का रास्ता खुल गया है। ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने वाली कंपनी आईआईएलएफ वाटर लिमिटेड ने डीपीआर तैयार कर ली है। डीपीआर शुक्रवार तक एसोसिएशन को मिल जाएगी। इसके बाद एसोसिएशन यह देखेगी कि डीपीआर इकाइयों की जरूरत के मुताबिक है या नहीं। और फिर इसको मंजूरी के लिए राज्य सरकार के पास भिजवा दिया जाएगा। प्लांट को मंजूरी मिलने के साथ ही ट्रीटमेंट प्लांट का काम शुरू हो जाएगा। उन्होंने बताया कि सांगानेर में प्रस्तावित ट्रीटमेंट प्लांट पर अनुमानित 46 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। इसके लिए केंद्र सरकार से अनुदान भी मिलेगा। वहीं कुछ राशि राज्य सरकार और उद्यमी वहन करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने ट्रीटमेंट प्लांट के लिए तीन साल का समय दिया है।

उन्होंने बताया कि ट्रीटमेंट प्लांट के लिए जयपुर विकास प्राधिकरण ने मुहान मोड पर छह बीघा और सांगा सेतु के पास पांच बीघा जमीन चिंहित की है। हालांकि इन स्थानों पर कुछ थोड़ी जमीन पर अतिक्रमण है। लेकिन यह चिंता की बात नहीं है, क्योंकि इसको हटाने का जिम्मा प्राधिकरण का है। उन्होंने बताया कि 15 वर्ष पहले प्रदूषित पानी की समस्या को लेकर एक जन हित याचिक दायर की गई थी। लगभग नौ वर्ष तक यह मामला राजस्थान हाईकोर्ट में चला था। हाईकोर्ट ने इन इकाइयों के खिलाफ फैसला सुनाया था, लेकिन उद्यमियों ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील कर दी थी। इसकी सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2009 में सांगानेर की इकाइयों के हक में फैसला सुना दिया था और इकाइयों से निकलने वाले गंदे पानी के लिए ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के निर्देश दिए थे।

इसके चलते ही प्रदूषित पानी के लिए सांगानेर में दो ट्रीटमेंट प्लांट लगाना तय हुआ है। इनके लगने के बाद सांगानेर की इकाइयों को भू-उपयोग बदलने की अनुमति मिल जाएगी। इससे इकाइयों की मुश्किलें भी समाप्त हो जाएगी। सांगानेर में करीब छह सौ इकाइयां हैं। इन इकाइयों में दुनिया भर में प्रसिद्ध सांगोनरी प्रिंट छपाई व रंगाई का काम किया जाता है। सांगानेरी प्रिंट कपड़े का उपयोग बेडशीट बनाने के साथ गारमेंट में होता है। इनका सालाना कारोबार लगभग सात सौ करोड़ रुपये हैं, जबकि सालाना तीन सौ करोड़ रुपये की सांगानेरी प्रिंट बेडशीट और गारमेंट का निर्यात किए जा रहे हैं।

बात पते की
ट्रीटमेंट प्लांट न होने से इकाइयों को भू उपयोग बदलने की अनुमति नहीं थी। इसके चलते इन इकाइयों को बैंकों से ऋण भी नहीं मिल पा रहा था।

Dainik bhaskar jaipur 28 अप्रैल 2010

Threat to unique block prints अद्वितीय सांगानेरी ब्लॉक प्रिंट के लिए खतरा

हाथ ब्लॉक छपाई भारत में सदियों पुरानी परंपरा है.लगभग 500 वर्ष पुराना है,हाथ ब्लॉक छपाई शिल्प एक विरासत के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है.हाथ ब्लॉक छपाई में सीमित उत्पादन और गहन मानव इनपुट है,

सीमित पानी,, प्राकृतिक रंजक के साथ बना,एक ब्रांड नाम हैं,परंपरागत शैली के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता है.

ब्लॉक प्रिंट सांगानेर में कार्यरत 150 units लगभग 3000 परिवारों को रोजगार प्रदान करते हैं.20,000 लोग सीधे इस शिल्प पर अपनी आजीविका के लिए निर्भर है.

सांगानेरी ब्लॉक प्रिंट में सीमित पानी की आवश्यकता होती है,प्रदूषण प्रबंधनीय सीमा के भीतर है. "Azo मुक्त रसायनों का प्रयोग, प्राकृतिक रंजक, यह पर्यावरण के अनुकूल है.

स्क्रीन प्रिंटिंग इस क्षेत्र के मुख्य प्रदूषक हैं,तो फिर hand block printers को क्यों दंडित किया जाना चाहिए?

Brij Ballabh Udaiwal ( National awarded artisan )
Shilpi
6/46 Near Silibery
Sanganer,
Pin-302029
Jaipur
01412731106
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