Sunday, August 29, 2010

सांगानेर की प्रिंटिंग इकाइयों का मुश्किल दौर होगा खत्म

बुधवार,28 अप्रैल, 2010 को बिजनेस भास्कर जयपुर
प्रदूषित पानी के लिए ट्रीटमेंट प्लांट का रास्ता होने से सांगानेर की प्रिटिंग इकाइयों की मुश्किलों का दौर समाप्त होने के आसार हो गए हैं। ट्रीटमेंट प्लांट के लिए इस सप्ताह शुक्रवार तक डीपीआर मिलने की उम्मीद है। इसके बाद ट्रीटमेंट प्लांट का काम भी जल्दी शुरू हो जाएगा। उल्लेखनीय है कि ट्रीटमेंट प्लांट नहीं होने से सरकार ने इन इकाइयों को भू उपयोग बदलने की अनुमति नहीं दी थी। इसके चलते इन इकाइयों को बैंकों से ऋण भी नहीं मिल पा रहा था लेकिन अब ट्रीटमेंट प्लांट लगने के बाद समस्याएं समाप्त हो जाएगी।

सांगानेर कपड़ा रंगाई-छपाई एसोसिएशन के महासचिव राजेंद्र जीनगर ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला हक में आने के बावजूद काफी समय तक ट्रीटमेंट प्लांट की फाइल दो विभागों के बीच फुटबाल बनी रही थी। बिजनेस भास्कर ने भी इस समस्या को उठाया था। इसके चलते अब ट्रीटमेंट प्लांट की स्थपना का रास्ता खुल गया है। ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने वाली कंपनी आईआईएलएफ वाटर लिमिटेड ने डीपीआर तैयार कर ली है। डीपीआर शुक्रवार तक एसोसिएशन को मिल जाएगी। इसके बाद एसोसिएशन यह देखेगी कि डीपीआर इकाइयों की जरूरत के मुताबिक है या नहीं। और फिर इसको मंजूरी के लिए राज्य सरकार के पास भिजवा दिया जाएगा। प्लांट को मंजूरी मिलने के साथ ही ट्रीटमेंट प्लांट का काम शुरू हो जाएगा। उन्होंने बताया कि सांगानेर में प्रस्तावित ट्रीटमेंट प्लांट पर अनुमानित 46 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। इसके लिए केंद्र सरकार से अनुदान भी मिलेगा। वहीं कुछ राशि राज्य सरकार और उद्यमी वहन करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने ट्रीटमेंट प्लांट के लिए तीन साल का समय दिया है।

उन्होंने बताया कि ट्रीटमेंट प्लांट के लिए जयपुर विकास प्राधिकरण ने मुहान मोड पर छह बीघा और सांगा सेतु के पास पांच बीघा जमीन चिंहित की है। हालांकि इन स्थानों पर कुछ थोड़ी जमीन पर अतिक्रमण है। लेकिन यह चिंता की बात नहीं है, क्योंकि इसको हटाने का जिम्मा प्राधिकरण का है। उन्होंने बताया कि 15 वर्ष पहले प्रदूषित पानी की समस्या को लेकर एक जन हित याचिक दायर की गई थी। लगभग नौ वर्ष तक यह मामला राजस्थान हाईकोर्ट में चला था। हाईकोर्ट ने इन इकाइयों के खिलाफ फैसला सुनाया था, लेकिन उद्यमियों ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील कर दी थी। इसकी सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2009 में सांगानेर की इकाइयों के हक में फैसला सुना दिया था और इकाइयों से निकलने वाले गंदे पानी के लिए ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के निर्देश दिए थे।

इसके चलते ही प्रदूषित पानी के लिए सांगानेर में दो ट्रीटमेंट प्लांट लगाना तय हुआ है। इनके लगने के बाद सांगानेर की इकाइयों को भू-उपयोग बदलने की अनुमति मिल जाएगी। इससे इकाइयों की मुश्किलें भी समाप्त हो जाएगी। सांगानेर में करीब छह सौ इकाइयां हैं। इन इकाइयों में दुनिया भर में प्रसिद्ध सांगोनरी प्रिंट छपाई व रंगाई का काम किया जाता है। सांगानेरी प्रिंट कपड़े का उपयोग बेडशीट बनाने के साथ गारमेंट में होता है। इनका सालाना कारोबार लगभग सात सौ करोड़ रुपये हैं, जबकि सालाना तीन सौ करोड़ रुपये की सांगानेरी प्रिंट बेडशीट और गारमेंट का निर्यात किए जा रहे हैं।

बात पते की
ट्रीटमेंट प्लांट न होने से इकाइयों को भू उपयोग बदलने की अनुमति नहीं थी। इसके चलते इन इकाइयों को बैंकों से ऋण भी नहीं मिल पा रहा था।

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